“जैसे ही मानसून की आहट होती है, हमारे पहाड़ आंसू बहाने लगते हैं।” पर्यावरण कार्यकर्ता और क्लाइमेट फ्रंट इंडिया के संस्थापक अनमोल ओहरी बताते हैं कि हिमालयी क्षेत्र, विशेषकर जम्मू और कश्मीर, विनाशकारी आपदाओं के चक्रव्यूह में फंसा है, जिसे एक्सप्रेसवे और जलविद्युत परियोजनाओं जैसी विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएँ और भी बदतर बना रही हैं। वह यह भी दिखाते हैं कि किस तरह स्थानीय समुदाय और युवा पीढ़ी ‘विकास’ के नाम पर अपने पहाड़ों को रौंदे जाने का डटकर विरोध कर रहे हैं।
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