स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप 2023

October 10, 2023
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सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी दिल्ली में स्थित एक संस्था है, जो भारत में वित्तीय जवाबदेही को मज़बूत करने और इसे बेहतर करने के लिये काम करती है। सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी छठी स्मितु कोठारी फ़ेलोशिप 2023 के लिए आवेदन आमंत्रित करती है।

2018 में शुरू की गयी इस फ़ेलोशिप का उद्देश्य, युवा लेखकों को समीक्षात्मक रूप से ऋण और ’विकास’ से परे वित्त की दुनिया को देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष, 2 महीने की अवधि के लिए 25,000 रुपये की राशि के साथ 10 फेलोशिप दी जाएंगी। यहाँ फ़ेलोशिप के बारे में अधिक जानकारी देखें।

फेलोशिप ऑक्टोबर 2023 में शुरू होगी, जिसमें तहत नीचे उल्लिखित विषयों से संबंधित विशिष्ट क्षेत्र / परियोजनाओं पर व्यापक, गहन-शोध के साथ इनवेस्टिगेटिव लेख, फोटो निबंध या लघु फिल्म बनाने का काम किया जा सकता है। 

विषय: 

इस फेलोशिप के लिए, फेलो कार्यक्रम, नीति या योजनाओं सहित रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाले मुद्दों के वित्तीय / आर्थिक पक्ष को देखते हुए एक लेख लिख सकते हैं। आपके आवेदन में आपके विषय के साथ एक प्रस्ताव होना चाहिए । आप वित्त से जुड़ी सभी चीज़ों के बारे में लिख सकते हैं, जिनमें पर्यावरणीय पहलू, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान/समूह जैसे जी20 और ब्रिक्स, संस्थानों की वित्तीय जवाबदेही, निजीकरण, कॉर्पोरेट जवाबदेही, कर चोरी, असमानता आदि, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं।

यह फ़ेलोशिप 40 वर्ष से कम आयु के सभी भारतीय नागरिकों के लिये, अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाओं के लेखकों के लिए उपलब्ध है।

आवेदन के लिये आवश्यकतायें:

कृपया इस फॉर्म के माध्यम से अपना आवेदन जमा करें।

एक से अधिक विषयों पर प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं।

यदि आवेदन न्यूनतम मानक पर खरे नहीं उतरते हैं तो सी.एफ.ए. के पास फ़ेलोशिप नहीं प्रदान करने का अधिकार है।

अपेक्षित काम

  • फेलोशिप के अंत तक प्रस्तावित विषय पर 1500-2000 शब्दों का एक व्यापक विश्लेषणात्मक लेख। या प्रस्ताव पर आधारित एक लघु वृत्तचित्र।
  • अध्येताओं से अपेक्षा की जाती है कि अनुमोदन के बाद वे अपने लेख प्रकाशित करवाएं।
  • फेलोशिप के पूरा होने के बाद सीएफए को विषय पर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

गाइड (मेंटर):

चयनित फेलो साथियों को वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान द्वारा गाइड किया जायेगा। वर्तमान में वो सर्वोदय प्रेस सेवा के संपादक हैं; उन्होंने दैनिक भास्कर, तहलका और अन्य प्रकाशनों में वरिष्ठ पदों पर काम किया है।

पात्रता:

  • ये फेलोशिप सभी के लिये उपलब्ध है।
  • महिलाओं, दलितों, मुसलमानों, वंचित समुदायों और क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने वाले स्वतंत्र लेखकों/शोधकर्ताओं को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

महत्वपूर्ण तारीखें:

आवेदन भेजने की अंतिम तारीख: 5 अक्टूबर, 2023   

चयनित फेलोशिप की घोषणा: 16 अक्टूबर, 2023 

लेख जमा कराने की तारीख: 20 दिसंबर, 2023 

लेख प्रकाशित कराने की अंतिम तारीख: 30 दिसंबर, 2023  

कॉपीराइट:

  • काम का सारा कॉपीराइट लेखकों के पास रहेगा । हालांकि, लेखक को उचित क्रेडिट देने के बाद, सी.एफ.ए. को काम का अनुवाद करने और प्रकाशित करने का अधिकार है।
  • दिल्ली में एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भाग लेने के लिये फेलो की आवश्यकता हो सकती है।

फेलोशिप संबंधित और किसी भी जानकारी के लिए संपर्क करें: fellowship@cenfa.org

संगठन के बारे में:

सेंटर फॉर फ़ाइनेंशियल अकॉउंटेबिलिटी (सी.एफ.ए.) भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वित्तीय संस्थानों की भूमिका का समालोचनात्मक विश्लेषण, मॉनिटरिंग और प्रत्यालोचना करने और वित्तीय संस्थानों का विकास, मानवाधिकारों और पर्यावरण पर प्रभाव से जुड़े मुद्दों पर काम करती है।

सी.एफ.ए. विभिन्न सिविल सोसाइटी समूहों, सामाजिक आंदोलनों और सामुदायिक समूहों के साथ मिलकर काम करते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती है कि वित्तीय संस्थान उन लोगों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह रहें, जिनका अस्तित्व उनकी सेवा करने के लिये है। हालांकि, हम दक्षिण एशिया क्षेत्र को भी देखते हैं और इक्कीसवीं सदी में अंतरराष्ट्रीय वित्त के वैश्विक स्वरूप को देखते हुए एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जोड़ते हुए चिंतन करना चाहते हैं। सी.एफ.ए. के बारे में और अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है।

स्मितु कोठारी के बारे में:

स्मितु कोठारी एक प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् और विद्वान-कार्यकर्ता थे, जो पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकारों के मुद्दों से जुड़े हुए थे। अपने पूरे जीवन के दौरान, उन्होंने सामूहिक रूप से एक राष्ट्रीय और वैश्विक विकल्प बनाने की कोशिश की, जो सामाजिक रूप से न्यायसंगत और पारिस्थितिक रूप से अनुकूल हो।

भौतिकी, संचार और समाजशास्त्र में प्रशिक्षित, कोठारी ने अमेरिका में कॉर्नेल और प्रिंसटन विश्वविद्यालयों में पढ़ाया। वह ‘द इकोलॉजिस्ट एंड डेवलपमेंट’ के एक ‘कंट्रीब्यूटिंग एडिटर’ भी थे। एक विपुल लेखक और संपादक के रूप में, उन्होंने समकालीन आर्थिक और सांस्कृतिक विकास, विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण, विकासात्मक विस्थापन और सामाजिक आंदोलनों के प्रत्यालोचना पर विस्तार से लिखा। उनके द्वारा संपादित कुछ पुस्तकें हैं:  वॉइसेस ऑफ स्ट्रगल: सोशल मूवमेंट इन एशिया (2006); वॉइसेस ऑफ सैनटी, इन सर्च ऑफ डेमोक्रेटिक स्पेस (2002); ए वाटरशेड इन ग्लोबल गवर्नेंस? एन इंडिपेंडेंट असेसमेंट ऑफ़ द वर्ल्ड कमीशन ऑनडैम्स; द वैल्यू ऑफ़ नेचर: इकोलॉजिकल पॉलिटिक्स इन इंडिया (2003); आउट ऑफ़ द न्यूक्लियर शैडो (ज़ियामियां के साथ, 2001); रीथिंकिंग ह्यूमन राइट्स: चैलेंजेस फॉर थ्योरी एंड एक्शन (1991); दनॉन–पार्टी पोलिटिकल प्रोसेस: अनसर्टेन अल्टेरनेटिव्स (एच. सेठी के साथ, 1988)।

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October 10, 2023
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