Subah Savere

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अधोसंरचना, ख़ासकर ऊर्जा के नाम पर  हमारे देश में जो हो रहा है उसे सार्वजनिक सम्पत्ति की खुल्लाम-खुल्ला लूट के अलावा क्या...
May 23, 2019
निजी कंपनियों के लिए कोई रुकावट नहीं हैं, आम चुनाव
क्या ठेठ चुनावी गहमा-गहमी के दौरान कोई निजी कपनी अपनी बिजली की कीमतों में इजाफा कर सकती है? और ऐसा करते हुए उसे कोई देख, टोक तक नहीं पाता? गौर से देखें तो बिजली या इसी तरह के कोई और जिन्स का उत्पादन करने वाली निजी कंपनियों की यह ताकत बदल-बदलकर सत्ता संभालने वाली राजनीतिक पार्टियों ने ही बढ़ाई है। अब...
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August 1, 2019
विश्वबैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से टकराते जनांदोलन 
विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन के ब्रेटेनवुड में खादी की गई वैश्विक वित्तीय संस्थाओं की ताक़त एक ज़माने में बेतेरह बढ़ी थी। वे अपनी मनमर्ज़ी के विकास की अवधारणा को दुनियाभर पर थोप सकती थीं। ऐसे में भारत के किसानों, आदिवासियों, मछुवारों द्वारा उन्हें ख़ारिज करवा लेना एक ऐतिहासिक जीत है। वर्ष 1993 में नर्म...
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May 21, 2019
शहर-गाँव के बीच की खाई तेज़ी से बढ़ा रहा विकास का आधुनिक मॉडल
अधोसंरचना, ख़ासकर ऊर्जा के नाम पर  हमारे देश में जो हो रहा है उसे सार्वजनिक सम्पत्ति की खुल्लाम-खुल्ला लूट के अलावा क्या कहा जा सकता है? मध्यप्रदेश सरीखे राज्य में जहाँ ख़ुद सरकारी दस्तावेज़ों के मुताबिक़ ज़रूरत से दो-ढाई गुणी बिजली पैदा हो रही है, राज्य सरकार छह निजी कम्पनियों से बिजली आपूर्ति के ल...
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