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प्राकृतिक दुनिया एक अद्भुत आश्चर्य है जो हम सभी को प्रेरित करती है। यह हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज और यहां तक कि...
गढ़चिरौली के आदिवासी समुदाय और नागरिक संगठन ने महाराष्ट्र और केन्द्र सरकार से मांग की है कि गढ़चिरौली में खनन संबंधी...
देश के 15 प्रतिशत भूखंड में आदिवासी समूह रहते हैं।वन, खदान, बांध आदि परियोजनाओं ने आदिवासियों के जीवन व जीविका को काफी प...
January 1, 2026
“नये साल में हम सभी का संकल्प हो” प्रकृति से कम लो, उसे अधिक लौटाओ: सतत जीवन का मूल मंत्र
प्राकृतिक दुनिया एक अद्भुत आश्चर्य है जो हम सभी को प्रेरित करती है। यह हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज और यहां तक कि हमारे अस्तित्व का आधार है। हमारे जंगल, नदियां, समुद्र और मिट्टी हमें भोजन, सांस लेने की हवा और अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पानी प्रदान करते हैं।इन प्राकृतिक संपत्तियों को अक्सर दु...
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December 2, 2025
चरम मौसम की घटनाएं जानलेवा साबित हो रहा है
भारत में चरम मौसम (एक्स्ट्रीम वेदर ) तेजी से बढ़ रहे हैं और अब यह केवल मौसमी उतार–चढ़ाव नहीं, बल्कि जीवन और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। हीटवेव, बाढ़, चक्रवात, सूखा, बादल फटना, आकाशिय बिजली गिरने, समुद्री तूफान और हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झील फटना जैसी घटनाएं पिछले एक दशक में रि...
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September 26, 2025
नदी तू निर्मल बहती रहना
विश्व नदी दिवस 28 सितंबर पर विशेष भारत की संस्कृति में नदियां जीवनदायिनी है।अन्नजल देने वाली इन नदियों को मां मानकर पूजा जाता है। नदियों के बिना मानव जाति के विकास की परिकल्पना असंभव थी। नदियों ने मानव जाति के साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाकर मानव जाति के विकास में पूरा सहयोग किया। उसकी दैन्दिनी की ह...
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September 10, 2025
पंजाब : बाढ़ के समय बांध से पानी छोड़ा जाना काल बन गया
भारत में बांधों को सिंचाई, बिजली और बाढ़ नियंत्रण का जरिया माना जाता है, लेकिन हालिया अनुभवों ने उनकी सीमाएँ उजागर कर दी हैं। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की बारिश से भाखड़ा, पौंग और रंजीत सागर बांधों से छोड़े गए पानी ने पंजाब को डुबो दिया। गलत संचालन और अनियोजित विकास ने बाढ़ आपदा को और गहरा कर दिया है। ...
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September 1, 2025
बीत चुका है, हिमालय को सुनने का समय 
मौजूदा अनियंत्रित विकास से किसी तरह अब तक बचे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के वाशिंदे चीख-चीखकर गुहार लगा रहे हैं कि अगले दस-पंद्रह सालों में उनके राज्यों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आप यदि ध्यान से इन दिनों आने वाली इन दो हिमालयी राज्यों की खबरों पर नजर रख रहे हों तो इस दुखद गुहार में कोई अतिशयोक्ति...
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August 28, 2025
पर्यावरणीय मंजूरी विवाद की जमीनी स्थिति
मध्यप्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) की कार्यशैली को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।मई 2025 में, सिया ने एक दिन में ही 450 परियोजनाओं को मंजूरी देकर स्वीकृत कर दिया गया था। जबकि आवश्यकता अनुसार साझी बैठक बुलाना अनिवार्य था। इस प्रक्रिया में बैठक आयोजित नहीं की गई, फाइलें जान...
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July 25, 2025
जलवायु संकट सभी के चिंताओं में शामिल हो
हर महाद्वीप के हर देश का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होगा। एक जलवायु प्रलय मंडरा रहा है, और हम इसके संभावित परिणामों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन मानवीय गतिविधियों के कारण होता है और जैसा कि हम जानते हैं, पृथ्वी पर जीवन के लिए ख़तरा है। बढ़ते ग्रीनहा...
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July 24, 2025
खनन के कारण संकट में वन्य प्राणी, खनन के लिए गढ़चिरौली में 1.23 लाख पेड़ काटे जाएंगे
गढ़चिरौली के आदिवासी समुदाय और नागरिक संगठन ने महाराष्ट्र और केन्द्र सरकार से मांग की है कि गढ़चिरौली में खनन संबंधी सभी मंजूरियां और गतिविधियों का रोका जाए और पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए), विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) आदि सहित पूर्ण पारिस्थितिक, जल विज्ञान और सामाजिक आकलन के साथ सभी अनुमोदन...
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July 15, 2025
‘कैम्पा’ से रोकी जा सकती है, वनों की कटाई
हमारी नीतियां, खासकर वन संबंधी नीतियां, इस अवधारणा पर टिकी होती हैं कि उपभोग के बाद हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को वापस पुनर्जीवित कर लेंगे। वनों की क्षतिपूर्ति की खातिर बना ‘कैम्पा’ इसी विचार की बानगी है, लेकिन क्या इस तरह से हम लाखों एकड़ जंगल काटकर वापस उसे हरा-भरा कर सकेंगे? ‘कैम्पा’ से भी आखिर क...
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July 9, 2025
संसाधनों के नियंत्रण को लेकर आदिवासीयों और सरकार के बीच द्वंद्व
देश के 15 प्रतिशत भूखंड में आदिवासी समूह रहते हैं।वन, खदान, बांध आदि परियोजनाओं ने आदिवासियों के जीवन व जीविका को काफी प्रभावित किया है।58 आदिवासी बहुल जिलों में 67 प्रतिशत से अधिक जंगल है। इन्हीं इलाकों के बङे भाग के जंगल को रिजर्व फॉरेस्ट, अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान रुप में बांट दिया गया है।इस ...
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