Raj Kumar Sinha

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आधुनिक विकास के तमाम-ओ-तमाम खटरागों की तरह हमारे यहां खेती भी दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। कमाल यह है कि इस बदहाल...
October 8, 2026
नदियां बचेंगी तो बचेगा जीवन : नदी संरक्षण की चुनौती
पृथ्वी पर नदियां जीवनदायिनी है। इसलिए अन्नजल देने वाली इन नदियों को मां मानकर पूजा जाता है।नदियों के बिना मानव जाति के विकास की परिकल्पना असंभव थी। नदियों ने मानव जाति के साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाकर मानव जाति के विकास में पूरा सहयोग किया। उसकी दैन्दिनी की हर जरूरत को पूरा किया। परंपरागत समय...
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September 22, 2026
यूपीआई पर एमडीआर शुल्क से उलझन में दुकानदार
यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान को आसान, तेज और लगभग बिना लागत के बनाकर छोटे दुकानदार से लेकर आम उपभोक्ता तक वित्तीय लेनदेन की आदत बदल दी है। ऐसे में बड़े व्यापारियों पर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का फैसला केवल भुगतान प्रणाली की लागत वसूलने का सवाल ...
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September 16, 2026
योजनाओं की भरमार, फिर भी बैगा बच्चों की मौत क्यों?
आदिवासी स्वास्थ्य नीति की जमीनी परीक्षामध्यप्रदेश देश के सबसे बड़े आदिवासी राज्यों में है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की लगभग 21.09 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति से आती है। राज्य की बड़ी आदिवासी आबादी ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहती है, जहां गरीबी, रोजगार की अस्थिरता, शिक्षा, पोषण और स्...
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September 16, 2026
चिप्स’ के चक्कर में फंसा किसान : बीज के अधिकार पर बहस
एक जमाने में जो किसान बोनी, बखरनी और चैत जैसे कामों भर से खेती कर लिया करते थे, आज उन्हें पेचीदे कृषि कानूनों की भारी-भरकम किताबों का सहारा लेना पड़ रहा है। वजह है, खेती-किसानी में बहुराष्ट्रीय कॉरपोरेट कंपनियों का प्रवेश। मसलन, हाल में किसानों के बीज पर आलू-चिप्स बनाकर भारी मुनाफा कूटने वाली क...
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September 16, 2026
पर्यावरण कानूनों की सर्वोच्चता का निर्णायक संदेश
भारत में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस लंबे समय से चल रही है। सड़क, बांध, खनन, ताप विद्युत संयंत्र, औद्योगिक परियोजनाओं और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसी बड़ी परियोजनाओं को आर्थिक विकास का आधार बताया जाता है, लेकिन इनके निर्माण से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन और संभावित नुकसान से बचाव ...
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September 16, 2026
परीक्षा व्यवस्था के संकट से लोकतांत्रिक टकराव तक
परीक्षा व्यवस्था के संकट से लोकतांत्रिक टकराव तकभारत में शिक्षा और सार्वजनिक भर्ती परीक्षा प्रणाली को लेकर उपजा असंतोष अब एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले लगभग एक महीने से हजारों छात्र-छात्राएं और युवा शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि शिक्...
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September 16, 2026
विस्थापितों की अनदेखी का ‘वन टाइम सैटलमेंट’
प्रधानमंत्री के जन्मदिन, 17 सितंबर 2017 को राष्ट्र को समर्पित ‘सरदार सरोवर’ बांध अब तक अधूरे पुनर्वास के चलते कुख्यात था, लेकिन अब विस्थापन-पुनर्वास, वन और राजस्व की जमीनों की डूब और संबंधित निर्माण कार्यों के खर्चों की भरपाई के बदले ठेंगा दिखाने के गुजरात-मॉडल ने उसे हाल में और बदनाम कर दिया ह...
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September 16, 2026
अल नीनो: भारत के भविष्य पर मंडराता संकट
ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार, 2026 के आखरी महीनों में एक अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो उभरने की पूरी आशंका है।वैज्ञानिकों ने भारत पर पड़ने वाले इस संभावित अल नीनो के प्रभाव को चार प्रमुख तिमाहियों में विभाजित किया है, जो देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर असर डालेगा। पहला जून से सितंबर 2026 में ...
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September 16, 2026
जहरीली होती जमीन
आधुनिक विकास के तमाम-ओ-तमाम खटरागों की तरह हमारे यहां खेती भी दिनों-दिन बदहाल होती जा रही है। कमाल यह है कि इस बदहाली को समाज, सरकार और सेठ की हैसियत के नागरिक विकास मानते और जपते रहते हैं। सवाल यह है कि क्या मौजूदा तौर-तरीकों से खेती की जाती रही तो वह कब तक बच पाएगी? और क्या यह संकट इंसानों के ...
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September 16, 2026
तेंदूपत्ता प्रबंधन से आत्मनिर्भरता की ओर आदिवासी समाज
कई ग्राम सभाओं ने तेंदूपत्ता संग्रह, भंडारण और बिक्री का निर्णय स्वयं लिया है। बिचौलियों की भूमिका घटने से मजदूरी का लाभ सीधे आदिवासी परिवारों तक पहुंच रहा है। यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की रचनात्मक मिसाल है। आदिवासी परिवारों के आजीविका का मुख्य आधार जंगल, कृषि और लघु वनोपज है।लंबे समय तक तेंदूपत्त...
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