Latest in
Publications
कैंब्रिज के अर्थशास्त्री, हा-जून चांग का मानना है कि ‘अर्थशास्त्र का 95 प्रतिशत सिर्फ सामान्य समझ है, जिसे गणित और भारी-...
April 25, 2019
किताब: भारत में आर्थिक तबाही
पिछले साढ़े चार वर्षों में, देश एक बड़ी सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल से गुजरा है जैसा पहले कभी नहीं था। हाल के इतिहास में कभी भी एक साथ देश के इतने बड़े समूह को और विशेषकर समाज में हाशिए पर रहे लोगों को इतनी परेशानी से नहीं गुजरना पड़ा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को देखते हुए, चाहे वह किसान हो...
Article
September 18, 2025
Update: A Great Victory: The Fight Continues!
In its historic decision on 27th Feb 2019, the U.S. Supreme Court decided that international organizations like the World Bank Group “don’t enjoy absolute immunity”. Simply put, with this judgement, the World Bank and other international financial institutions can be sued anywhere for the damages...
Article
April 23, 2019
Book: Rubbles of an Economic Earthquake
In the past four and a half years, the country has gone through a major socio-political and economic upheaval as never before. At no point in the recent history has the country as a whole, and more importantly the marginalised sections of the society, been subjected to such distress. Looking at each...
Article
February 18, 2019
विशेष रिपोर्ट: एनटीपीसी का कड़वा सच
नेशनल थर्मल पाॅवर काॅरपोरेशन (एनटीपीसी) भारत के चार ‘‘नवरत्नों‘‘ में से एक होने के साथ, एक “फार्च्यून 500″ कंपनी भी है। भारत के विकास में एनटीपीसी ने चार दशकों से ऊपर एक अहम् भूमिका अदा की है। पश्चिमी देशों में तय किया गया विकास का ढांचा पूर्ण रूप से ऊर्जा पर निर्भर है और जिसने विगत वर्ष...
Article
May 21, 2019
बुकलेट: तीसरे चरण के बाद दिल्ली मेट्रो का वित्तीय विश्लेषण
कैंब्रिज के अर्थशास्त्री, हा-जून चांग का मानना है कि ‘अर्थशास्त्र का 95 प्रतिशत सिर्फ सामान्य समझ है, जिसे गणित और भारी-भरकम शब्दावली का प्रयोग करके मुश्किल बनाया जाता है।’ इससे हम समझ सकते हैं कि लोग वित्त से जुड़े मामलों से दूर क्यों रहते हैं। सरकारें नयी परियोजनाओं, योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषण...
Article