Raj Kumar Sinha

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जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खद...
नई सरकार और संसद के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनेक इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ...
वर्तमान लाक डाउन में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक बार फिर 12 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया 2006 में ...
November 18, 2024
पिछड़ता पर्यावरण
जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खदेड़ने में लगी है, उन्हीं वनों को दान-दक्षिणा में पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। क्या इस तरह की मौजूदा नीतियां जंगलों को सुरक्षित, संरक्षित कर पाएंगी? ‘वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचक...
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November 4, 2024
बाघों के बहाने वीरान होते गांव
पर्यावरण के पिरामिड की चोटी पर बाघ विराजता है और उस पर मंडराता कोई भी संकट दरअसल पर्यावरण पर संकट माना जाता है। जाहिर है, ऐसे में किसी भी कीमत पर बाघ और उसके लिए जंगल बचाना ‘वैज्ञानिक वानिकी’ की ‘संतानों’ के लिए पुनीत कर्तव्य हो जाता है। इस धतकरम में उन लाखों-लाख आदिवासियों, वन-निवासियों की कोई परवा...
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October 14, 2024
मध्यप्रदेश में अमृत सरोवर का यथार्थ       
आजादी का अमृत महोत्सव काल में अमृत सरोवर (तालाब) योजना शुरू किया गया था। जिसमें देश के 28 राज्य और 5 केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे। सभी जिलों में 75 अमृत सरोवर को विकसित करना या पुनर्जीवित करना था। जिससे 50 हजार सरोवर बनाए जाने का लक्ष्य था। इस मिशन अमृत सरोवर को 15 अगस्त 2023 तक पूरा किया जाना तय कि...
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September 30, 2024
वर्षा की तीव्रता,आवृत्ति और बांध के कारण बाढ़ आपदा
औसत वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण लंबे समय तक बारिश न होने के और अचानक अत्यधिक बारिश की घटना के कारण बाढ़ में बढोतरी हुआ है। आपदा आने से ठीक पहले वायनाड केरल में अभूतपूर्व बारिश हुई थी। जिले की सलाना औसत का 6 प्रतिशत बारिश महज़ एक दिन में बरस गई। विगत कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन वर्षा की तीव्रता औ...
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September 9, 2024
छोटे किसानों की अनदेखी: भारतीय कृषि का अनसुलझा संकट
कृषि अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि खेती को बरकरार रखने,विकसित करने और सबका पेट भरने की अधिकांश जिम्मेदारी छोटे और सीमांत किसान ही निभाते हैं। जहां 70% ग्रामीण परिवार अभी भी अपनी आय के प्राथमिक स्रोत के रूप में कृषि पर निर्भर हों तथा 82 % किसान छोटे एवं सीमांत हों, वहां यह बात वाजिब भी है, लेकि...
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August 19, 2024
वर्तमान आर्थिक गैर-बराबरी का मकड़जाल
देश आजादी के बाद समाजवादी आर्थिक – सामाजिक व्यवस्था की स्थापना के लिए संकल्प लिया था। इस संकल्प को पूरा करने संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर ने इसे संविधान के प्रस्तावना में स्थान दिया। परन्तु पिछले तीन दशकों के दौर में आर्थिक गैर- बराबरी तेजी से बढ़ी है और बढ़ती जा रही है। आजादी के शुरुआती दौ...
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July 4, 2024
गर्मी से गहराता संकट
नई सरकार और संसद के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनेक इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाए। दिनों-दिन गहराते ये संकट क्या केवल राजनीतिक खींचतान की वजह से ही हैं? या फिर इसके ऐसे कारण भी हैं जिन्हें हल करने के लिए हमारे राजनीतिक नेतृत्व को समझदारी से ठ...
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June 11, 2024
परमाणु ऊर्जा में विदेशी पैसा 
डेढ़ दशक पहले अमरीका के साथ होने वाले जिस परमाणु समझौते को लेकर तब की मनमोहन सिंह सरकर गिरने-गिरने को हो गई थी, आज वही परमाणु ऊर्जा खुल्लम-खुल्ला धंधे में उतर आई हैं। दुनियाभर में गरियाई जा रही यह ऊर्जा भारत की सरकार को लुभा रही है। क्या हैं, इसके निहितार्थ? प्रस्तुत है, इसकी पड़ताल करता राज कुमार ...
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May 26, 2020
कारपोरेट के लिए पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया में हो रहा है बदलाव ?
वर्तमान लाक डाउन में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक बार फिर 12 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया 2006 में संशोधन हेतु ई.आई.ए 2020 प्रस्तावित किया है।जिसमें पर्यावरणीय मंजूरी के पहले ही परियोजना निर्माण कार्य करने की छूट, कई परियोजनाओं को पर्यावरण जन सुनवाई से मुक्ति, खदान परियोजनाओं की...
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