Raj Kumar Sinha

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ईरान के शहर रामसर के केस्पियन सागर तट पर दो फरवरी 1971 को अंतर्राष्ट्रीय वेटलैंड (आद्रभूमि) कन्वेंशन का आयोजन हुआ था। जि...
संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 10 दिसम्बर को मानवाधिकार की एक विश्वव्यापी घोषणा पत्र को अंगीकृत किया गया। मानवाधिकार घ...
समाज के गठन में अगर उत्पादन की पद्वति एक बुनियादी आधार है तो यह माना जा सकता है कि खेती ने मानव सभ्यता के विकास में मनुष...
मछली जलीय पर्यावरण पर आश्रित जलीय जीव है तथा जलचर पर्यावरण को संतुलित रखने में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिस ...
February 27, 2025
जलवायु परिवर्तन संकट में ताप विद्युत संयंत्रों की भूमिका
जलवायु परिवर्तन का संकट तो वैश्विक समस्या है। जिसके कई कारण हैं, जैसे कि जीवाश्म ईंधनों (कोयला,तेल और गैस) का जलना, वनों की कटाई और कृषि। वनों की कटाई विकास परियोजनाओं, कृषि विस्तार और पशुपालन वृद्धि के लिए चारा उपलब्ध कराना आदि प्रमुख कारण है। गाय और भेड़ बडी मात्रा में मीथेन का उत्पादन करती है जो ...
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February 25, 2025
थर्मल प्लांट के राख से त्रस्त किसान और जनता
Photo by Makarand Purohit/Flickr.भारत की लगभग 71.22 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों से उत्पन्न होती है। देश में 180 ताप विद्युत संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता 212 गीगावाट (1 गीगावाट=1000 मेगावाट) है जिसे 2030 तक बढ़ाकर 260 गीगावाट किया जाना है। ग्राउंड रिपोर्टर शिशिर अग्रवाल के अनु...
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February 19, 2025
कानून में किए गए संशोधनों के पीछे का निहितार्थ
केन्द्र सरकार ऐसे कानूनों में बदलाव ला रही है या लाने के लिए प्रयासरत है जो वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता और खनन से जुड़े हैं। ऐसे कानूनों में लाए जा रहे बदलावों से आदिवासियों और वन निवासियों के जीवन पर विनाशकारी प्रभाव पङ रहा है। संविधान में आदिवासियों और वन निवासियों क...
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February 18, 2025
पर्यावरण संकट को लेकर बजट प्रावधान नाकाफी
वित्तीय वर्ष 2025- 26 में बजट अनुमान 50,65,345 करोड़ रुपए का है। जिसमें केन्द्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को 3412.82 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है जो 2024-25 के प्रावधानों 3330.37 करोड़ रुपए से थोड़ा बढ़ा है। केन्द्रीय पर्यावरण, वन‌‌‌ एवं जलवायु परिवर्तन को मिले वर्तमान बजट में के...
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February 4, 2025
विश्व आर्द्रभूमि दिवस ( 2 फरवरी) पर विशेषआद्रभूमि को संरक्षित करने का सार्थक प्रयास आवश्यक
ईरान के शहर रामसर के केस्पियन सागर तट पर दो फरवरी 1971 को अंतर्राष्ट्रीय वेटलैंड (आद्रभूमि) कन्वेंशन का आयोजन हुआ था। जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ ने दो फरवरी को आद्रभूमि दिवस घोषित किया था। जो आद्रभूमि विश्व भर में जैवविविधता और मानव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है, उन्हें ‘रामसर साईट’...
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January 25, 2025
सौर से सस्ती होगी बिजली   
भले ही दो दिन बाद सर्वशक्तिमान माने जाने वाले अमरीका का राजपाट एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में आ जाए जिसमें जलवायु परिवर्तन पर हुआ ‘पेरिस समझौता’ जरा भी नहीं सुहाता, लेकिन लगातार बढ़ता तापक्रम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की जरूरत रेखांकित करता ही है। जीवाश्म ईंधन की जगह अब वायु और सौर ऊर्जा ने ले ली है। प...
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January 7, 2025
सामुदायिक निस्तार संसाधनों की अनदेखी
प्राकृतिक संसाधनों और कॉमन्स, जैसे सामुदायिक भूमि, वन, चारागाह और जल निकाय स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो इन संसाधनों पर निर्भर हैं और उनके सतत उपयोग एवं संरक्षण के लिए पीढ़ियों से प्रयासरत हैं। कॉमन्स न केवल हमारी पारिस्थितिकी को संतुलित रखते हैं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, जैव विविधता, और ज...
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December 10, 2024
10 दिसम्बर मानवाधिकार पर विशेषमानवाधिकारों का बचाव,जबाबदेही और पारदर्शिता का अभाव
संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा 10 दिसम्बर को मानवाधिकार की एक विश्वव्यापी घोषणा पत्र को अंगीकृत किया गया। मानवाधिकार घोषणा पत्र उन सभी बिंदुओं को समाहित किया गया जो गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक है।इस घोषणा पत्र में कुल 30 अनुच्छेद हैं। इसके अनुसार सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से जन्म लेते हैं तथा...
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November 26, 2024
26 नवंबर संविधान दिवस पर विशेषसंविधान सम्मत गांव गणराज्य की पुनर्स्थापना
समाज के गठन में अगर उत्पादन की पद्वति एक बुनियादी आधार है तो यह माना जा सकता है कि खेती ने मानव सभ्यता के विकास में मनुष्य को उसे स्थिरता दी और धीरे- धीरे आपसी सहमति के आधार पर खेती के इर्दगिर्द एक सामाजिक- सांस्कृतिक संरचना का निर्माण हुआ। इस तरह जीवन जीने के लिए स्थायी साधन के रूप में खेती और उससे...
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November 20, 2024
21 नवंबर – विश्व मत्स्य दिवसनर्मदा की महाशीर मछली के अस्तित्व पर संकट
मछली जलीय पर्यावरण पर आश्रित जलीय जीव है तथा जलचर पर्यावरण को संतुलित रखने में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिस पानी में मछली नहीं हो तो निश्चित ही उस पानी की जल जैविक स्थिति सामान्य नहीं है। वैज्ञानिकों द्वारा मछली को जीवन सूचक (बायोइंडीकेटर) माना गया है। विभिन्न जलस्रोतों में चाहे तीव्र अथ...
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