Raj Kumar Sinha

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इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का विषय है “प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास”।प्राचीन समय से ही ...
भारत में 60 करोड़ से अधिक लोग भूमि, जल, जंगल और समुद्र जैसे प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं । देश में 14.6 करोड़ छोटे और...
May 30, 2025
जलाशयों की ठेकेदारी, मछुआरों पर भारी
जल के विविध स्रोतों में तालाब, नदी और जलाशय शामिल है। इसी जलसंपदा में मछली की विविध प्रजातियां करोड़ों लोगों के लिए अन्न सुरक्षा देती है तथा मछुआरों के लिए आजीविका का आधार भी बनती है। स्थानीय मछुआरों का जल और जलसंपदा पर अधिकार सुनिश्चित हो इसके लिए शासकीय सहयोग प्राप्त होना जरूरी होता है। आज प्राकृत...
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May 20, 2025
अन्तर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस 22 | मई जैव विविधता पृथ्वी पर सभी जीवन का आधार है
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का विषय है “प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास”।प्राचीन समय से ही भारत के ऋषि-मुनियों को प्रकृति संरक्षण और मानव के स्वभाव की गहरी जानकारी थी। वे जानते थे कि मानव अपने क्षणिक लाभ के लिए कई मौकों पर गंभीर भूल कर सकता है। अपना ही भारी नुकसान कर सकत...
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May 14, 2025
वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी दावों में विरोधाभास
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को दिए गए हलफनामे में बताया है कि 5.46 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। एनजीटी ने वन भूमि पर अतिक्रमण का स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से ये जानकारी मांगी थी।वन विभाग के वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन ...
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May 6, 2025
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई ): प्रकृति निर्भर मजदूरों की व्यापक आर्थिक सुरक्षा कैसे हो?
भारत में 60 करोड़ से अधिक लोग भूमि, जल, जंगल और समुद्र जैसे प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं । देश में 14.6 करोड़ छोटे और सीमांत किसान, 14.4 करोड़ खेतिहर मजदूर ( बड़ी संख्या में दलित हैं), 27.5 करोड़ वन निवासी, 2.8 करोड़ मछुआरे, 1.3 करोड़ पशुपालक और 1.7 करोड़ कारीगर हैं जो सीधे तौर पर प्रकृति के साथ ...
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April 24, 2025
विकेन्द्रिकरण का मंजिल दूर है
पंचायती राज दिवस (24 अप्रेल) पर विशेषसत्ता महात्मा गांधी ने स्वराज के बारे में चार बातें कही। एक, आत्म शासन और आत्म संयम। दो, स्वराज से मेरा अभिप्राय है लोक सहमति से चलने वाला भारत वर्ष का शासन। तीन, हमारी शासन पद्धति गांव की प्रकृति के अनुरूप होनी चाहिए। चार, स्वराज ही राम राज्य है। महात्मा गांधी अ...
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April 17, 2025
अधोसंरचना विकास के नाम पर कर्ज का दर्द
वर्ष 2005 में नगर निगम जबलपुर ने शहर में सीवर लाइन व नाला निर्माण वाटर ड्रेनेज योजना के नाम पर एशियन डेवलपमेंट बैंक से 196 करोड़ का कर्ज लिया था।न तो सीवर लाइन का काम ही अभी तक पूरा हो पाया है और न ही नाला निर्माण ही पूर्ण हो पाया है। सीवर लाइन प्रोजेक्ट में करीब एक हजार करोड़ रुपए लग चुका है और अभी...
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April 16, 2025
स्वास्थ्य सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित हो
भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (अनुच्छेद 38, 39, 42, 43 और 47) स्वास्थ्य के अधिकार को प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करने के लिए राज्य का दायित्व सुनिश्चित करता है। संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार, स्वास्थ...
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March 31, 2025
लाखों आदिवासियों और वनवासियों परबेदखली के आदेश का खतरा
आगामी 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार कानून पर महत्वपूर्ण केस की सुनवाई होगी। ज्ञात हो कि 2019 में जब इस मामले की सुनवाई हुई थी,तब सत्रह लाख से भी अधिक परिवारों को संभावित बेदखली का सामना करना पड़ा था। हालांकि तब कोर्ट ने अपने इस आदेश को रोक दिया था और परिवारों पर मंडरा रहे बेदखली के संकट को...
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March 25, 2025
22 मार्च विश्व जल दिवस पर विशेष जल संरक्षण से कल सुरक्षित होगा
गर्मी की आहट शुरू होते ही पीने के पानी का संकट शुरू हो जाता है। प्रशासनिक अमला भी लोगों को पानी की दिक्कत न हो इसके लिए प्रयास करना शुरू कर देता है। परन्तु पानी बचाने से लेकर उसके संरक्षण की बात अक्सर सरकार और समाज के बीच से गायब ही रहता है।पृथ्वी पर 97 प्रतिशत भाग पानी है जिसमें से केवल 2.5 प्र...
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March 18, 2025
प्लास्टिक प्रदूषण – एक जानलेवा संकट
आधुनिक विकास के नाम पर जिन ‘भस्मासुरों’ को बनाया, बढ़ाया जा रहा है, प्लास्टिक उनमें से एक है। कुल-जमा सौ-सवा सौ साल पहले ईजाद किया गया यह कारनामा आज प्रकृति-पर्यावरण और इंसानों के अस्तित्व के लिए संकट बन गया है। क्या हैं, इसके खतरे? पिछले साल के अंत में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित ‘अंतर –...
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