Raj Kumar Sinha

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गढ़चिरौली के आदिवासी समुदाय और नागरिक संगठन ने महाराष्ट्र और केन्द्र सरकार से मांग की है कि गढ़चिरौली में खनन संबंधी...
देश के 15 प्रतिशत भूखंड में आदिवासी समूह रहते हैं।वन, खदान, बांध आदि परियोजनाओं ने आदिवासियों के जीवन व जीविका को काफी प...
शुष्क भूमि पारिस्थितिकी तंत्र, जो दुनिया के एक तिहाई से अधिक भूमि क्षेत्र को कवर करता है, अत्यधिक दोहन और अनुचित भूमि उप...
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय दिवस है। वर्ष 1972 में पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राज...
August 13, 2025
देश भर के किसानों ने राष्ट्रपति को पत्र भेजा
विगत 29 और 30 जुलाई को भूमि अधिकार आंदोलन के राष्ट्रीय बैठक में निर्णय लिया गया था कि 13 अगस्त 2025 को भूमि कब्जा और कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह सिर्फ ज़मीन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह हमारे रोज़गार, लोकतंत्र और गरिमा की रक्षा का संघर्ष है।पिछले एक दशक में, ...
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July 28, 2025
आदिवासी महिलाओं को संपत्ति पर अधिकार का ऐतिहासिक फैसला
हाल-फिलहाल में सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि लिंग के आधार पर आदिवासी महिलाओं को उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित करना असंवैधानिक है और पैतृक संपत्ति पर उनके समान अधिकार की पुष्टि की है। फैसले में कहा गया है किसी आदिवासी महिला या उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को केवल लिंग के आधार पर पैतृक संपत्ति ...
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July 25, 2025
जलवायु संकट सभी के चिंताओं में शामिल हो
हर महाद्वीप के हर देश का हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होगा। एक जलवायु प्रलय मंडरा रहा है, और हम इसके संभावित परिणामों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। जलवायु परिवर्तन मानवीय गतिविधियों के कारण होता है और जैसा कि हम जानते हैं, पृथ्वी पर जीवन के लिए ख़तरा है। बढ़ते ग्रीनहा...
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July 24, 2025
खनन के कारण संकट में वन्य प्राणी, खनन के लिए गढ़चिरौली में 1.23 लाख पेड़ काटे जाएंगे
गढ़चिरौली के आदिवासी समुदाय और नागरिक संगठन ने महाराष्ट्र और केन्द्र सरकार से मांग की है कि गढ़चिरौली में खनन संबंधी सभी मंजूरियां और गतिविधियों का रोका जाए और पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए), विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) आदि सहित पूर्ण पारिस्थितिक, जल विज्ञान और सामाजिक आकलन के साथ सभी अनुमोदन...
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July 15, 2025
‘कैम्पा’ से रोकी जा सकती है, वनों की कटाई
हमारी नीतियां, खासकर वन संबंधी नीतियां, इस अवधारणा पर टिकी होती हैं कि उपभोग के बाद हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को वापस पुनर्जीवित कर लेंगे। वनों की क्षतिपूर्ति की खातिर बना ‘कैम्पा’ इसी विचार की बानगी है, लेकिन क्या इस तरह से हम लाखों एकड़ जंगल काटकर वापस उसे हरा-भरा कर सकेंगे? ‘कैम्पा’ से भी आखिर क...
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July 9, 2025
संसाधनों के नियंत्रण को लेकर आदिवासीयों और सरकार के बीच द्वंद्व
देश के 15 प्रतिशत भूखंड में आदिवासी समूह रहते हैं।वन, खदान, बांध आदि परियोजनाओं ने आदिवासियों के जीवन व जीविका को काफी प्रभावित किया है।58 आदिवासी बहुल जिलों में 67 प्रतिशत से अधिक जंगल है। इन्हीं इलाकों के बङे भाग के जंगल को रिजर्व फॉरेस्ट, अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान रुप में बांट दिया गया है।इस ...
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July 11, 2025
उपभोक्ताओं को महंगी बिजली से राहत का इंतजार
मध्यप्रदेश का बिजली देश में सबसे महंगी बेची जाती है।क्योंकि उत्पादन और वितरण की ईमानदारी से नियमन और निगरानी नहीं होती है।वास्तव में सरकार ने उर्जा के उत्पादन और वितरण की नीतियों के मामले में जन जनपक्षीय भूमिका नहीं निभाई है। वर्ष 2003 में विधुत मंडल के घाटे को खत्म करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने ब...
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June 20, 2025
विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस(17 जून)मिट्टी क्षरण और वर्षा पानी को रोकना मरुस्थलीकरण का सामाधान
शुष्क भूमि पारिस्थितिकी तंत्र, जो दुनिया के एक तिहाई से अधिक भूमि क्षेत्र को कवर करता है, अत्यधिक दोहन और अनुचित भूमि उपयोग के लिए बेहद संवेदनशील है।मरुस्थलीकरण शुष्क, अर्ध-शुष्क और शुष्क उप-आर्द्र क्षेत्रों में भूमि का क्षरण है, यह मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तनों के कारण होता है...
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June 5, 2025
विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेषप्लास्टिक प्रदुषण पर्यावरण के लिए खतरा,प्रभावी प्रतिबंध जरूरी
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय दिवस है। वर्ष 1972 में पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने की थी।हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला यह संयुक्त राष्ट्र दिवस दुनिया भर के लाखों लोगों को हमारे ग्रह ...
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May 30, 2025
जलाशयों की ठेकेदारी, मछुआरों पर भारी
जल के विविध स्रोतों में तालाब, नदी और जलाशय शामिल है। इसी जलसंपदा में मछली की विविध प्रजातियां करोड़ों लोगों के लिए अन्न सुरक्षा देती है तथा मछुआरों के लिए आजीविका का आधार भी बनती है। स्थानीय मछुआरों का जल और जलसंपदा पर अधिकार सुनिश्चित हो इसके लिए शासकीय सहयोग प्राप्त होना जरूरी होता है। आज प्राकृत...
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