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वर्तमान लाक डाउन में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक बार फिर 12 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया 2006 में ...
September 16, 2026
प्रकृति का मौन विलाप: विलुप्त होती प्रजातियों की पुकार
धरती पर जीवन का इतिहास करोड़ों वर्षों पुराना है, जिसमें असंख्य प्रजातियां उत्पन्न हुई और समय के साथ समाप्त भी हो गई। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से भी होती रही है, लेकिन आधुनिक काल में मानव गतिविधियों ने इसे असामान्य रूप से तेज कर दिया है। पहले भी ज्वालामुखी, उल्कापिंड की टक्कर और प्राकृतिक जलवा...
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September 16, 2026
पूंजी, प्रकृति और नीति: बजट में जलवायु न्याय की तलाश
पर्यावरण के साथ पूंजी के संबंध मामले में पहले की तमाम बुराइयां आज उन क्षेत्रों में प्रकट हो गयी है जिन्हें आमतौर पर “पर्यावरण संकट” कहते हैं, जिसके अंतर्गत ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन सतह का ध्वंस, उष्णकटिबन्ध के जंगलों का विनाश, मछलियों का बेतहाशा मरना, प्रजातियों का विलोप,जैव विविधता का...
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May 26, 2020
कारपोरेट के लिए पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया में हो रहा है बदलाव ?
वर्तमान लाक डाउन में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एक बार फिर 12 मार्च 2020 को पर्यावरण प्रभाव निर्धारण प्रकिया 2006 में संशोधन हेतु ई.आई.ए 2020 प्रस्तावित किया है।जिसमें पर्यावरणीय मंजूरी के पहले ही परियोजना निर्माण कार्य करने की छूट, कई परियोजनाओं को पर्यावरण जन सुनवाई से मुक्ति, खदान परियोजनाओं की...
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