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NATURE
प्राकृतिक दुनिया एक अद्भुत आश्चर्य है जो हम सभी को प्रेरित करती है। यह हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज और यहां तक कि...
October 11, 2026
नदियां बचेंगी तो बचेगा जीवन : नदी संरक्षण की चुनौती
पृथ्वी पर नदियां जीवनदायिनी है। इसलिए अन्नजल देने वाली इन नदियों को मां मानकर पूजा जाता है।नदियों के बिना मानव जाति के विकास की परिकल्पना असंभव थी। नदियों ने मानव जाति के साथ सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाकर मानव जाति के विकास में पूरा सहयोग किया। उसकी दैन्दिनी की हर जरूरत को पूरा किया। परंपरागत समय...
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September 16, 2026
तेंदूपत्ता प्रबंधन से आत्मनिर्भरता की ओर आदिवासी समाज
कई ग्राम सभाओं ने तेंदूपत्ता संग्रह, भंडारण और बिक्री का निर्णय स्वयं लिया है। बिचौलियों की भूमिका घटने से मजदूरी का लाभ सीधे आदिवासी परिवारों तक पहुंच रहा है। यह आर्थिक आत्मनिर्भरता की रचनात्मक मिसाल है। आदिवासी परिवारों के आजीविका का मुख्य आधार जंगल, कृषि और लघु वनोपज है।लंबे समय तक तेंदूपत्त...
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September 16, 2026
प्रकृति का मौन विलाप: विलुप्त होती प्रजातियों की पुकार
धरती पर जीवन का इतिहास करोड़ों वर्षों पुराना है, जिसमें असंख्य प्रजातियां उत्पन्न हुई और समय के साथ समाप्त भी हो गई। यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से भी होती रही है, लेकिन आधुनिक काल में मानव गतिविधियों ने इसे असामान्य रूप से तेज कर दिया है। पहले भी ज्वालामुखी, उल्कापिंड की टक्कर और प्राकृतिक जलवा...
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September 16, 2026
पृथ्वी का संकट: असंतुलित विकास और पारिस्थितिकी विनाश
22 अप्रैल विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेषपृथ्वी मनुष्य जाति का निवास स्थान है।यह एक ऐसा ग्रह है जहां जीवन है। यही पृथ्वी प्रकृति है। प्रकृति ही मनुष्य जाति के लिए जीने की चीजें जुटाती है। किन्तु आज पृथ्वी का‌ पर्यावरण खतरे में है। हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं जब संपूर्ण पारिस्थितिकी विनाश की संभावना...
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January 16, 2026
माधव गाडगिल : प्रकृति, विज्ञान और जनतंत्र के पक्षधर पर्यावरणविद्
भारत में पर्यावरण संरक्षण की वैचारिक और वैज्ञानिक नींव रखने वाले जिन व्यक्तित्वों ने विकास की मुख्यधारा को चुनौती दी, उनमें प्रो. माधव धोंडो केशव गाडगिल का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे न केवल एक प्रतिष्ठित पारिस्थितिकी वैज्ञानिक रहे हैं, बल्कि उन्होंने पर्यावरण को लोकतंत्र, स्थानीय समुदायों और ...
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January 1, 2026
“नये साल में हम सभी का संकल्प हो” प्रकृति से कम लो, उसे अधिक लौटाओ: सतत जीवन का मूल मंत्र
प्राकृतिक दुनिया एक अद्भुत आश्चर्य है जो हम सभी को प्रेरित करती है। यह हमारी अर्थव्यवस्था, हमारे समाज और यहां तक कि हमारे अस्तित्व का आधार है। हमारे जंगल, नदियां, समुद्र और मिट्टी हमें भोजन, सांस लेने की हवा और अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पानी प्रदान करते हैं।इन प्राकृतिक संपत्तियों को अक्सर दु...
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January 16, 2023
Joshimath Disaster
An inevitable result of long neglect of scientific warnings, of gross financialization of nature and total lack of Environmental and Social Safeguard Policies!  Joshimath woke up to large cracks on roads and houses with muddy water seeping from them, not in one or two but in over 600 houses! News me...
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