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इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का विषय है “प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास”।प्राचीन समय से ही ...
जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खद...
बक्सवाहा के जंगल के नीचे हीरे पाए जाने की खोज जबसे रियो टिंटो कंपनी ने की है, तब से बक्सवाहा क्षेत्र के भौतिकवादी विकास ...
May 20, 2025
अन्तर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस 22 | मई जैव विविधता पृथ्वी पर सभी जीवन का आधार है
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का विषय है “प्रकृति के साथ सामंजस्य और सतत विकास”।प्राचीन समय से ही भारत के ऋषि-मुनियों को प्रकृति संरक्षण और मानव के स्वभाव की गहरी जानकारी थी। वे जानते थे कि मानव अपने क्षणिक लाभ के लिए कई मौकों पर गंभीर भूल कर सकता है। अपना ही भारी नुकसान कर सकत...
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February 27, 2025
जलवायु परिवर्तन संकट में ताप विद्युत संयंत्रों की भूमिका
जलवायु परिवर्तन का संकट तो वैश्विक समस्या है। जिसके कई कारण हैं, जैसे कि जीवाश्म ईंधनों (कोयला,तेल और गैस) का जलना, वनों की कटाई और कृषि। वनों की कटाई विकास परियोजनाओं, कृषि विस्तार और पशुपालन वृद्धि के लिए चारा उपलब्ध कराना आदि प्रमुख कारण है। गाय और भेड़ बडी मात्रा में मीथेन का उत्पादन करती है जो ...
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January 7, 2025
सामुदायिक निस्तार संसाधनों की अनदेखी
प्राकृतिक संसाधनों और कॉमन्स, जैसे सामुदायिक भूमि, वन, चारागाह और जल निकाय स्थानीय समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो इन संसाधनों पर निर्भर हैं और उनके सतत उपयोग एवं संरक्षण के लिए पीढ़ियों से प्रयासरत हैं। कॉमन्स न केवल हमारी पारिस्थितिकी को संतुलित रखते हैं, बल्कि ग्रामीण आजीविका, जैव विविधता, और ज...
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November 18, 2024
पिछड़ता पर्यावरण
जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खदेड़ने में लगी है, उन्हीं वनों को दान-दक्षिणा में पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। क्या इस तरह की मौजूदा नीतियां जंगलों को सुरक्षित, संरक्षित कर पाएंगी? ‘वैश्विक प्रकृति संरक्षण सूचक...
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February 24, 2022
हीरा खनन परियोजना से पन्ना जिले का विकास कहां पहुंचा | भाग 1
बक्सवाहा के जंगल के नीचे हीरे पाए जाने की खोज जबसे रियो टिंटो कंपनी ने की है, तब से बक्सवाहा क्षेत्र के भौतिकवादी विकास और रोजगार के अवसरों की चर्चा जोरों पर है, स्थानीय लोगों की अपनी अलग – अलग सोच और विकास के मापदण्ड है और शहरी लोगो ने  कोरोना काल में  ऑक्सीजन का जो संकट झेला है, भले ही प्राण...
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