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Agriculture
समाज के गठन में अगर उत्पादन की पद्वति एक बुनियादी आधार है तो यह माना जा सकता है कि खेती ने मानव सभ्यता के विकास में मनुष...
November 26, 2024
26 नवंबर संविधान दिवस पर विशेषसंविधान सम्मत गांव गणराज्य की पुनर्स्थापना
समाज के गठन में अगर उत्पादन की पद्वति एक बुनियादी आधार है तो यह माना जा सकता है कि खेती ने मानव सभ्यता के विकास में मनुष्य को उसे स्थिरता दी और धीरे- धीरे आपसी सहमति के आधार पर खेती के इर्दगिर्द एक सामाजिक- सांस्कृतिक संरचना का निर्माण हुआ। इस तरह जीवन जीने के लिए स्थायी साधन के रूप में खेती और उससे...
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September 9, 2024
छोटे किसानों की अनदेखी: भारतीय कृषि का अनसुलझा संकट
कृषि अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि खेती को बरकरार रखने,विकसित करने और सबका पेट भरने की अधिकांश जिम्मेदारी छोटे और सीमांत किसान ही निभाते हैं। जहां 70% ग्रामीण परिवार अभी भी अपनी आय के प्राथमिक स्रोत के रूप में कृषि पर निर्भर हों तथा 82 % किसान छोटे एवं सीमांत हों, वहां यह बात वाजिब भी है, लेकि...
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July 16, 2020
Random Reflections: 51 Years of Bank Nationalisation – Was it a sin? A vision? A missed opportunity? & What’s today’s position?
Nationalisation of the banks which had deposits above Rs.50 Crores, covering almost 85% of the total deposits on 19th July 1969 was historic, dramatic and welcomed by majority of the people. Some described it a sin, Jan Sangh, the earlier Avatar of BJP opposed it. Some went to court but the banking...
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